छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में विंध्य पर्वतमाला पर समुद्रतल से लगभग 3781 फीट की ऊंचाई पर बसे मैनपाट(Mainpat) को 'छत्तीसगढ़ का शिमला  कहा जाता है। 

इसकी वादियों में बसे 1500 तिब्बती परिवारों के कारण इसे मिनी तिब्बत भी कहते हैं। 

ठंड और बारिश के दिनों में मैनपाट का सौंदर्य अपने चरम पर होती है, इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। 

सर्दियों में यह इलाका बर्फ की महीन चादर से ढंक जाता है तो बारिश में लगता है जैसे बादल जमी पर उतर आए हों। 

मैनपाट से लगा हुआ है जलजलवान, जिसे जलजली भी कहते हैं। यहां दो से तीन एकड़ क्षेत्र में धरती काफी नर्म है और जाने से हिलने लगती है। 

बारिश के मौसम में उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण बादल काफी नीचे आ जाते हैं। बादलों के धरा के नजदीक आ जाने से इन दिनों वहां धुंध सा नजारा है 

मैनपाट में निजी हाट बने हुए हैं। इसके अलावा पर्यटन विभाग का रिसार्ट भी उपलब्ध है। 

मैनपाट(Mainpat) जिला अंबिकापुर/सरगुजा से 50 किलोमीटर की दूरी पर है। जिला अंबिकापुर से जाने के दो रास्ते हैं, पहला अंबिकापुर-सीतापुर रोड़ से होकर और दूसरा ग्राम दरिमा होते हुए।  

मैनपाट(Mainpat) कालीन और पामेलियन कुत्तों के लिए भी प्रसिद्ध है। साथ ही बाक्साइट की खदानें भी हैं, जहां से बालको (BALCO) के लिए बाक्साइट निकला जाता है।  

मैनपाट में एक ऐसी भी जगह है, जहां पर पानी उलटा बहता हुआ दिखाई देगा, जबकि प्राकृतिक रूप से पानी नीचे की ओर बहता है जो कि गुरुत्वाकर्षण के कारण होता है. 

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