पांडव अपने वनवास के दौरान जहां-जहां गए, वहां-वहां उनसे जुड़ी कोई न कोई जगह है, जो आज देखा कर पौराणिक कथाओं पर विश्वास और पक्का हो जाता है।

मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में बनीं पांडव गुफाएं ऐसी ही जगह है, जिसका नाता पांडवों के वनवास से है।

माना जाता है कि पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ यहां करीब 12 साल रुके थे। उन्होंने यहां रहते हुए कई दिन काटे थे।

पुरातत्व विभाग की मानें तो ये गुफा बुद्ध साधुओं ने पहली शताब्दी को बनवाई थी। वो यहां एकांत में समय गुजारना चाहते थे।

पांडव गुफा गिनती में पांच हैं और एक छोटे पहाड़ पर ऊंचाई पर बनी हैं। इन गुफाओं में सबसे बड़ी और हवादार गुफा को द्रौपदी कुटी कहा जाता है

इसमें एक गुफा मेडिटेशन के लिए बनी है। जिसमें ईको इफेक्ट भी है। पचमढ़ी की गुफाओं में दीवारों पर पेंटिंग भी बनी हुई थी, जो समय के साथ मिटगई है।

पचमढ़ी शहर का नाम भी पांडवों से जुड़ा हुआ है। यहां आम लोग मानते हैं कि पांडवों के पांच कमरों या गुफाओं के आधार पर ही शहर का नाम पचमढ़ी रखा गया है

इसमें पच का मतलब 5 है तो मढ़ी का मतलब कुटिया। पचमढ़ी मध्य प्रदेश का अकेला हिल स्टेशन है।

आने का सही समय- इस पौराणिक जगह को देखने के लिए आपको सुबह 8 से शाम 6 बजे के बीच ही आना होगा।

पचमढ़ी आने के लिए राज्य के तकरीबन सभी बड़े शहरों भोपाल, जबलपुर, इंदौर आदि से बसें चलती हैं।

अगर यहां ट्रेन से आना है तो पचमढ़ी से करीबी रेलवे स्टेशन पिपरिया है। यहां से 47 किलोमीटर दूर स्थित पिपरिया तक देश के कई बड़े शहरों से सीधी ट्रेन मिल जाती है।

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