400 सालों तक बर्फ में दबा हुआ था केदारनाथ, जानिए इस तीर्थ के कुछ रोचक किस्से..

ये कोई पौराणिक कथा नहीं बल्कि वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून के द्वारा रिसर्च किया हुआ फैक्ट है।

2013 में बाढ़ से कैसे बचा था ये मंदिर?

इस मंदिर के बचने के पीछे की कहानी कुछ ऐसी है कि जब बाढ़ का पानी मंदिर के इर्द-गिर्द पहुंचा था तब एक चट्टान ऊपर से खिसक कर मंदिर के पीछे आ गई थी।

केदारनाथ की कथा महाभारत के युग से शुरू होती है।

क्यों केदारनाथ पड़ा नाम-

पौराणिक कथाओं के अनुसार असुरों से बचने के लिए देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की थी।

केदारनाथ का ये मंदिर पंच केदार का हिस्सा है जो पांच धार्मिक स्थल भगवान शिव को समर्पित हैं।

भारत के सभी शिव मंदिरों में सबसे ऊंचा

इसकी ऊंचाई 3,583 मीटर (11,755 फीट) है। यह इसे भारत के सभी शिव मंदिरों में सबसे ऊंचा स्थान बनाता है।

लेकिन इस मंदिर के निर्माण की आश्चर्यजनक बात यह है कि इसके निर्माण में पत्थर की बड़ी-बड़ी शिलाओं का प्रयोग किया गया था

लेकिन मंदिर के अंदर और भी कई मूर्तियां हैं। पार्वती, पांच पांडव भाइयों, द्रौपदी, वीरभद्र और भगवान शिव के वाहन नंदी की मूर्तियां हैं

दरअसल जब मंदिर के पुजारियों के द्वारा सर्दियों में मंदिर के कपाट बंद कर ताला लगा दिया जाता है तब मंदिर के अंदर एक जलता हुआ दीपक छोड़ दिया जाता है।

पुराणों में यह भविष्यवाणी की गयी है कि भविष्य में केदारनाथ धाम लुप्त हो जाएगा।