मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के मूल लोगों की मूल पहचान बनाए रखने के लिए आईएलपी के बिना बाहरी लोगों के प्रवेश की अनुमति नहीं है

यह व्यवस्था भारत में ब्रिटिश शासन के समय से ही 1873 से चली आ रही है।

– ILP राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है जो ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से आवेदन कर प्राप्त किया जा सकता है।

– ज़ारी किए गए परमिट पर्यटकों, किरायेदारों तथा अन्य उद्देश्यों के लिए अलग-अलग प्रदान किए जाते हैं।

दस्तावेज़ यात्रा की तारीखों को बताता है और उन विशेष क्षेत्रों को निर्दिष्ट करता है जिनमें ILP धारक यात्रा कर सकता है।परमिट में दिए गए समय का उलंघन करना आगंतुक के लिए अवैध है।

ILP का कार्यान्वयन ILP प्रक्रिया के तहतशरणार्थियों को राज्यों में बसने से रोकता है।

– हाल ही में, मेघालय में आदिवासी संगठनों ने राज्य में बाहरी लोगों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने के लिए दोबारा इनर लाइन परमिट (ILP) व्यवस्था की मांग शुरू की है।

– मेघालय में इनर लाइन परमिट की मांग पिछले दो दशकों से अधिक समय से चली आ रही है और ‘खासी छात्रसंघ’ (KSU) इसे आगे बढ़ा रहा है।

ILP की आवश्यकता – स्वदेशी संस्कृति और परंपरा का संरक्षण करना। – बाहरी प्रवासियों द्वारा सम्बंधित राज्य में अतिक्रमण को रोकना।

विदेशियों के लिए प्रावधान मणिपुर: किसी परमिट की आवश्यकता नहीं है। लेकिन उन्हें पंजीकरण करना होगा।