नार्थ सेंटिनल द्वीप (North Sentinel Island) वर्तमान में भारत के बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान द्वीप का एक द्वीप है

1.नार्थ सेंटिनल द्वीप में बसने वाली इस सेंटीनेलीज जनजाति अभी तक द्वीप के बाहर मौजूद दुनिया और उसके लोगो से पूरी तरह कटे हुए है

यदि कोई बाहरी दुनिया के इंसान इनसे मिलने की कोशिश करते है तो वो इन सबको एलियंस समझकर बाहर से आये इंसानों पर हमला कर देते है |

3. सेंटीनेलीज जनजाति के लोगो की रोग प्रतिरोधकता शक्ति बहुत कम होती है जिसके कारण ये बाहरी दुनिया लोगो के संपर्क में आकर अगर बीमार पड़े तो मर जाते है

सरकार ने भी वर्ष 1956 से इस जनजाति को लुप्त होने से बचाने के लिए  बाहरी लोगो के द्वीप में 10 किलोमीटर के क्षेत्र में प्रवेश करने को वर्जित कर रखा है |

2001 की एक आधिकारिक जनगणना के अनुसार इस द्वीप पर 21 पुरुष और 18 औरतो समेत 40 थी और अभीऐसा माना जाता है कि अभी इस जनजाति के 400 से 500  व्यक्ति  इस द्वीप पर मौजूद होंगे |

सेंटीनेलीज जनजाति के लोग ना ही खेती करना जानते है, ना ही आग जलाना और  न ही जानवर पालना जानते है | इन्होंने अब तक न नमक खाया है और न ही शक्कर का स्वाद चखा है

धनुष-बाण के जरिये स्थानीय जंगली और समुंद्री जीवो जैसे कि सुअर, कछुआ, मछली आदि का शिकार करके अपना भोजन बनाते है |

सेंटीनेलीज जनजाति के लोग शरीर की बनावट से कद में बहुत छोटे, काली चमड़ी के होते है और इनमे पुरुष और स्त्री कोई भी वस्त्र नही पहनते है |

सेंटीनेलीज जनजाति के लोग भूत-प्रेत और विभिन्न पुरानी प्रथाओ में बहुत विश्वास रखते है जिसके कारण वो लोग बीमारी आदि में पूजा-पाठ और जड़ी-बूटियों का सहारा लेते है

सेंटीनेलीज जनजाति के लोग अबतक बाहर से आनेवाले कई लोगो पर तीर-भालो आदि से हमला करके उनकी हत्या कर चुके है 

वर्ष 1991 में पहली बार भारतीय मानव विज्ञानियों के एक दल का सेंटीनेलीज जनजाति के लोगो के साथ शांतिपूर्ण सम्पर्क हुआ