रहस्यों से भरे कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां जा तो सकते हैं लेकिन ये यात्रा हर किसी के बस की बात नहीं है.

ऐसी ही एक रोमांच और चुनौतियों से भरपूर यात्रा है आदि कैलाश पर्वत की.

इस यात्रा में चुनौतियां भी हैं, रोमांच भी है और साथ ही बेहद खूबसूरत रास्तों से गुजरने का अनुभव भी

करीब 6 हजार मीटर की ऊंचाई पर मौजूद आदि कैलाश को छोटा कैलाश भी कहा जाता है

उत्तराखंड के खूबसूरत जिले पिथौरागढ़ के सीमांत इलाके धारचूला से इस यात्रा की शुरुआत होती है

सड़क के रास्ते से आप धारचूला से तवाघाट पहुंचते हैं और यहीं से आदि कैलाश के लिए ट्रैकिंग की शुरुआत हो जाती है

यहां की मनमोहक खूबसूरती हर थकान को दूर कर देती है. बर्फ से ढके पहाड़, बुग्याल और रंगों से भरे फूल मन खुश कर देते हैं.

इसके बाद कालापानी नदी के रास्ते यात्री गुजरते हैं और इस दौरान नेपाल के अपि पर्वत को देख मन खुश हो जाता है.

जिसके बाद यात्री कुंटी यांक्ति पहुंचते हैं. इस जगह का नाम पांडवों की मां कुंती के नाम पर रखा गया है.

करीब चार दिनों की यात्रा करने के बाद जब यात्री छह हजार मीटर की ऊंचाई पर मौजूद आदि कैलाश पर्वत पर पहुंचते हैं तो इसका सम्मोहन हर किसी पर होता ही है.

आदि कैलाश के आधार पर स्थित धोती पार्वती झील आपको अलौकिक अनुभव में ले जाती है.

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