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Adi Kailash: कैसे पहुंचे आदि कैलाश, यहां मिलेगी पूरी जानकारी

Adi Kailash : आज हम आपको भारत के कैलाश, आदि कैलाश (Adi Kailash) के बारे में बताने जा रहे हैं। अब यहां पर  पहुंचना भी अत्यंत सरल और कम खर्चीला है। 12 अक्टूबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (NARENDRA MODI)ने पार्वती ताल पर ध्यान लगाया और आदि कैलाश को  देखा। आदि कैलाश उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में है. यह चीन (CHINA)की सीमा से महज 20 किमी. दूर है।

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Adi Kailash: कैसे पहुंचे आदि कैलाश

इसी इलाके से कैलाश मानसरोवर यात्रा (KAILASH MANSAROVAR YATRA)भी होती है। शुरू में केवल कैलाश यात्री ही आदि कैलाश का दर्शन करते थे, लेकिन अब कैलाश मानसरोवर यात्रा बंद हो गई है, तो भारत के कैलाश के रूप में जाना जाने वाला आदि कैलाश में शिवभक्तों की बहुतायत आती है। यहां पहुंचने का रास्ता बहोत ही  दिलचस्प है, मगर यहा  जाने के लिये सड़क मार्ग उपलब्ध है।

धारचूला( Dharchula )में जारी होता है यात्रा का परमिट

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यात्रियों को आदि कैलाश पहुंचने के लिए पिथौरागढ़ (PITHORAGARH)से ९० किलोमीटर दूर धारचूला में स्वास्थ्य परीक्षण और परमिट मिलता है। इसके बाद उच्च हिमालयी क्षेत्र की यात्रा शुरू होती है। लगभग आठ सौ किलोमीटर चलने के बाद आता है। ज्योलिंगकोंग में 15,000 फीट की ऊंचाई पर पवित्र आदि कैलाश को देखा जा सकता है। यहां आदि कैलाश की तल में मानसरोवर के समान गौरी कुंड और पार्वती ताल है।

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कैलाश पर्वत की तरह दिखता  है Adi Kailash

हिंदुओं की आस्था का प्रतीक छोटा कैलाश है, ये आदि कैलाश। इस पवित्र पर्वत को लोग बहुत मानते हैं। इसके धार्मिक महत्व को लोग सम्मान देते हैं। अगर आप आदि कैलाश (ADI KAILASH)को देखते हैं, तो आपको लगता है कि ये कैलाश पर्वत है।

यही कारण है कि अगर आप कैलाश पर्वत नहीं जा सकते तो उत्तराखंड(UTTARAKHAND) में आदि कैलाश की यात्रा करें। क्योंकि इससे कैलाश दर्शन की तरह पुण्य मिलेगा।

आदि कैलाश कैसे पहुंचे (How to Reach Adi Kailash)?

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Adi Kailash उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में है। यहां से काठगोदाम हल्द्वानी रेलवे स्टेशन(HALDWANI RAILWAY STATION) नजदिक है। जबकि पंंतनगर सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। पिथौरागढ़ में भी हवाई अड्डा है, लेकिन फिलहाल वहां से फ्लाइट नहीं चलती।

हल्द्वानी पहुंचने के बाद आप बस या टैक्सी से पिथौरागढ़ जा सकते हैं। धारचूला के लिए आप टनकपुर रेलवे स्टेशन से बस या टैक्सी भी ले सकते हैं। धारचूला से पांच किलोमीटर चलकर तपोवान पहुंच सकते  है। रास्ते में मालपा गांव मिलता है। यहाँ आप सुंदर झरने देख सकते हैं।

गुंजी पहुंचने से पहले सीता पुल के करें दीदार

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सीता पुल आपको गुंजी पहुंचने से पहले मिलेगा। यहां पर सीता पुल, जो भारत और नेपाल (INDIA AND NEPAL)की पहाड़ियों को जोड़ता है, दिखाई देता है। जो हवा में झूलता हुआ लकड़ी का टुकड़ा है। यहां से थोड़ा आगे चलकर पार्वती सरोवर मिलेगा।

Adi Kailash के दर्शन कर मिलती है मन को शांति

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यहां मशहूर शिव पार्वती मंदिर है। इस सरोवर के पास काली मंदिर है। शेषनाग पर्वत (SHESHNAG PARVAT)और वेदव्यास गुफा इसके निकट हैं। यहीं से आदिम पर्वत को देखा जा सकता है। यात्रियों को पिथौरागढ़ से ९० किलोमीटर दूर धारचूला पहुंचने पर चिकित्सा जांच की जाती है। इसके बाद इनर लाइन परमिट मिलता है।

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