andman Nicobar islands:भारत का क्यों है?

andman Nicobar islands:6 नवंबर 1943 को जापान ने भारत को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सौंप दिया। यह द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुआ था और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के स्वतंत्रता सेनानियों का समर्थन था।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जापानी सेना को अपनी स्वतंत्रता सेना के साथ मिलकर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह को मुक्त करने की कोशिश की। नेताजी ने द्वीपों को “शहीद” और “स्वराज” नाम देने का सुझाव दिया था जब जापान ने उन्हें भारत को सौंप दिया, ताकि वे अपनी स्वतंत्रता संग्राम की भावनाओं को व्यक्त कर सकें।

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लेकिन बाद में ये द्वीप फिर से अपने मूल नामों पर लौट गए और अब उन्हें “अंडमान और निकोबार द्वीप समूह” कहा जाता है।

पाकिस्तान के स्थापना के बाद उसने अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह को अपने आधिकार में करने का प्रयास किया था, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हुआ।

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने कई तर्क प्रस्तुत किए थे, जैसे कि अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह में बहुत सी मुस्लिम आबादी है, और वे इसे पाकिस्तान के साथ मिलाकर एक मुस्लिम राज्य का हिस्सा बनाना चाहते थे। हालांकि, नेहरू ने इसे भारतीय राष्ट्र के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा और इसे अपने प्रशासनिक प्रशासन के तहत रखने का फैसला किया।

मुख्य रूप से, 1947 के भारतीय आजादी के बाद अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह भारत सरकार के आधिकार में था, और नेहरू जी ने इसे भारत के हिस्से में रखने का निर्णय लिया। उनका दृष्टिकोण था कि यह द्वीप समूह भारतीय जनसंख्या और संस्कृति से अलग हो चुका है और इसे भारतीय संगठन का हिस्सा बनाने का यत्रा सफल नहीं हो सकता है।

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने कई तर्क प्रस्तुत किए थे, जैसे कि अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह में बहुत सी मुस्लिम आबादी है, और वे इसे पाकिस्तान के साथ मिलाकर एक मुस्लिम राज्य का हिस्सा बनाना चाहते थे। हालांकि, नेहरू ने इसे भारतीय राष्ट्र के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा और इसे अपने प्रशासनिक प्रशासन के तहत रखने का फैसला किया।

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इस तरह, अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह भारत के एक प्रदेश के रूप में बना और पाकिस्तान के इसके आधिकार को अस्वीकार कर दिया गया।

अंडमान निकोबार भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

6 नवंबर 1943 को जापान ने भारत को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सौंप दिया। यह द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुआ था और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के स्वतंत्रता सेनानियों का समर्थन था।

भारतीय महासागर क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के कई कारण हैं:

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रक्षा और सुरक्षा: भारतीय समुंद्री सेना के लिए ये द्वीप समूह रणनीतिक महत्व रखते हैं क्योंकि वे भारत के पूर्वी समुंद्र की सतह पर हैं। यहाँ भारतीय सेना की आधुनिक नौसेना और वायुसेना के आयुधों को स्थानांतरित करने की सुविधा है, जो समुंद्री सुरक्षा में मदद करता है।

रणनीति महत्व: भारत की समुंद्री रणनीति में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये द्वीप समूह भारत के पूर्वी समुंद्र क्षेत्र को अनदेखा नहीं करते हैं और कई समूद्री देशों के साथ रणनीतिक सहयोग की संभावनाओं को बढ़ाते हैं।

धननीति और विकास: प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न ये द्वीप समूह मुख्य रूप से पर्यटन और मत्स्य पालन का क्षेत्र हैं। द्वीप समूह में अनुवादिक उद्योग और अन्य उद्यमों के विकास की संभावनाएं हैं, जो स्थानीय लोगों के जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

मानवाधिकार और बचाव: ये स्थान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आदिवासी जनजातियों की आवासीयता और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Ocean Trail: द्वीपों को भारतीय महासागर क्षेत्र में सागरीय मार्ग के रूप में भी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि वे विभिन्न समूद्री शिपिंग और व्यापार प्रक्रियाओं को सहायता देते हैं।

भारत के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सुरक्षा, रक्षा, रणनीति, अर्थनीति और संरक्षण के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण हैं।

भारत में कुल कितने द्वीप है?How many islands on andman Nicobar islands

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भारत में 1,208 द्वीप हैं (निर्जन सहित)। इसके अलग-अलग आकार, प्राकृतिक स्वरूप और अर्थ हैं। इनमें से कुछ बहुत बड़े हैं, जो अधिकांश अर्थव्यवस्था और जनसंख्या का केंद्र हैं, जबकि अन्य कई छोटे द्वीप प्राकृतिक सुंदरता और निर्जनता के लिए प्रसिद्ध हैं।

भारत सरकार अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को नियंत्रित करती है और केंद्र शासित प्रदेश हैं। यह द्वीप समूह भारतीय महासागर क्षेत्र में है, इसलिए भारत सरकार इसका प्रबंधन, सुरक्षा, आर्थिक विकास आदि देखभाल करती है।

भारत का सबसे छोटा द्वीप कौन सा है?

बिट्रा द्वीप, आंधमान और निकोबार द्वीप समूह में भारत का सबसे छोटा द्वीप है। यह एक द्वीप है जिसमें लोग रहते हैं, हालांकि इसका क्षेत्रफल बहुत छोटा है।

अंडमान द्वीप समूह में रहने वाले विभिन्न आदिवासी लोगों की अपनी-अपनी अलग-अलग भाषाएँ हैं। महान अंडमानीज़, ओंग, जरवा, सेंटिनेली आदि आदिवासी भाषाएँ हैं।

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यह भाषाएँ आम भाषाओं से अलग हैं और उनके आदिवासी समुदाय की संस्कृति, जीवनशैली और संगति से जुड़ी हैं। इन भाषाओं में से अधिकांश मौखिक रूप से बोली जाती हैं और लिखित नहीं होती हैं।andman Nicobar islands

अंडमान निकोबार द्वीप में जाने का सही समय

  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत के पूर्वी समुंद्र क्षेत्र में हैं, जहां का जलवायु उष्णकटिबंधीय है (अधिकांश वर्षा वाले महीनों में तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है)। यहाँ मानसून में वर्षा होती है और मौसम समुद्री होता है।
  • नवंबर से अप्रैल तक, जब मौसम शांत और सूखा होता है, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की यात्रा करना सबसे अच्छा है। इस परियोध के दौरान आमतौर पर तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस रहता है और बहुत कम वर्षा होती है। यह सुरक्षित और आदर्श यात्रा है।andman Nicobar islands
  • हालाँकि, मौसम की विशेषताएं और आकार बदल सकते हैं, इसलिए स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और पर्यटन प्राधिकृतियों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

अंडमान निकोबार में कौन सी जाति के लोग रहते हैं?andman Nicobar islands

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कई अलग-अलग आदिवासी जनजातियाँ रहती हैं। यहाँ बहुत सारे आदिवासी समुदाय हैं, जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण निम्नलिखित हैं:

गेट अंडमानीज़: ये आदिवासी लोग ग्रेट अंडमान द्वीप पर रहते हैं। लेकिन इनकी संख्या कम है, वे बहुत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व रखते हैं।

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ओङ्ग: ये आदिवासी समुदाय लिट्टल अंडमान द्वीप पर रहते हैं और अपने व्यवस्थित समुदाय और आदिवासी जीवनशैली के लिए जाना जाता है।

जेवर: ये आदिवासी लोग अंडमान द्वीप के निषिद्ध क्षेत्र में रहते हैं और बोलने से बचते हैं।andman Nicobar islands

सेंटिनेली भाषी: सेंटिनेली द्वीप पर रहने वाले इस आदिवासी समुदाय को कम ज्ञान है और वे संवाद से दूर रहते हैं।

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ये कुछ प्रमुख आदिवासी समुदायों में से हैं जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में रहते हैं। इन समुदायों की संस्कृति, जीवनशैली और सांस्कृतिक विविधता बहुत महत्वपूर्ण है।andman Nicobar islands

अंडमानीज कहां से आए थे?

ग्रेट अंडमानीज़ आदिवासी समुदाय जो अंडमान द्वीप पर रहते हैं, उनके पूर्वजों की स्पष्ट उत्पत्ति का पता लगाना मुश्किल है। वे इस द्वीप समूह में पूरी तरह से शीतोष्णकटिबंधीय जीवनशैली जीते हैं और उनका मुख्य आहार समुद्री भोजन और तिलहन है।

निष्कर्षित उत्पत्ति और आगमन की जानकारी बहुत छोटी होने के कारण, उनके पूर्वजों के आगमन की विशिष्ट बातों का प्रमाण नहीं मिल सकता। यह एक शोध क्षेत्र रहा है और कई अनुसंधानकर्ताओं और विशेषज्ञों ने इसका अध्ययन किया है, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला है।

अंडमान की खोज किसने की थी?

1-1700 और 1800 के दशक में, कई लोग अंडमान द्वीप समूह को भारतीय महासागर में खोजने लगे। इनमें से कुछ प्रमुख व्यक्तित्व निम्नलिखित हैं:andman Nicobar islands

2-कप्तान जेम्स कुक: 1778 में, ब्रिटिश खोजकर्ता कप्तन जेम्स कुक ने अपनी तीसरी यात्रा में अंडमान द्वीप समूह खोजा। उन्होंने इस समूह के कुछ द्वीपों को दर्ज किया और विश्व भर में उनकी सूचना दी।andman Nicobar islands

3-सर जॉन होर्नमैन (सर जॉन होर्नमैन): 1789 में, इतिहासकार और ग्राफिक डिजाइनर सर जॉन होर्नमैन ने अंडमान द्वीप की खोज की। उस समय के यात्रियों को इस द्वीप समूह के बारे में अधिक जानने में मदद मिली, क्योंकि वे विस्तृत विवरण और चित्र देते थे।

4-Sir Daniel Corrie:
1824 में, डेनियल कॉरी ने अंडमान द्वीप समूह को भारतीय महासागर में खोजा। इस खोज में, उन्होंने इस द्वीप समूह के कई द्वीपों का पता लगाया और उनके चित्रण और विवरण प्रस्तुत किए।

ये कुछ लोग थे जिन्होंने अंडमान द्वीप समूह की खोज की और इसके बारे में विश्व को बताया।

अंडमान निकोबार कैसे जाये How To Reach andman Nicobar Islands

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अगर आप अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको निम्नलिखित तरीकों में से कुछ करना होगा:

प्लेन से: यात्रा करना सबसे तेज़ और सुविधाजनक हो सकता है। दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई आदि स्थानों से आप पोर्ट ब्लेयर या उसके आसपास के विमानस्थलों पर उड़ान भर सकते हैं।andman Nicobar islands

समुद्र तट से: क्रूज़ों का भी उपयोग करके कुछ यात्री अंडमान और निकोबार पहुँचते हैं। यह एक लंबी यात्रा हो सकती है, लेकिन यह आपको एक अनूठा अनुभव दे सकता है।

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जलयात्रा: भारतीय महासागर की यात्रा समुद्र मार्ग से भी की जा सकती है। इसके लिए कोलकाता या पोर्ट ब्लेयर से जलयानों का उपयोग करना होगा।andman Nicobar islands

यह आपकी यात्रा की योजना और पर्यटन संस्थाओं से मिली सलाह पर निर्धारित हो सकता है। यात्रा पहले से ही आवश्यक आप्रूचक होनी चाहिए, और स्थानीय कानूनों का पालन करना चाहिए।

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